गाइड
मोल-भाव में घाटा कैसे रोकें
स्टाफ को ज़्यादा डिस्काउंट देने से कैसे रोकें?
हर आइटम की ख़रीद (कॉस्ट) लिख लें, उस पर एक “कम से कम दाम” तय करें जिससे नीचे स्टाफ न बेचे (जैसे ख़रीद + 20%), बिल पर डिस्काउंट की एक सीमा रखें, और इससे नीचे के हर बिल के लिए मालिक की मंज़ूरी ज़रूरी करें। फिर हर हफ़्ते देखें कि किस स्टाफ ने कितना डिस्काउंट दिया। Tap & Bill का मोल-भाव गार्ड यह जाँच काउंटर पर ही करता है: कम से कम दाम से नीचे का बिल तभी सेव होता है जब मालिक अपना PIN डाले।
घाटा कहाँ से होता है
कपड़े की दुकान में टैग का दाम मोल-भाव की शुरुआत है। ग्राहक दाम कम करवाता है, और अच्छा सेल्समैन जानता है कि कहाँ रुकना है। मुश्किल यह है कि मालिक पूरे दिन काउंटर पर नहीं रह सकता, और बिल पर सिर्फ़ आख़िरी दाम दिखता है। रविवार की भीड़ में ₹700 की ख़रीद वाली जींस ₹650 में चली गई, यह किसी को पता नहीं चलता।
- नए स्टाफ को आपकी ख़रीद नहीं पता, इसलिए उसे नहीं पता कि घाटा कहाँ से शुरू होता है।
- बिक्री पर इंसेंटिव पाने वाला स्टाफ सौदा पक्का करना चाहता है, मार्जिन बचाना नहीं।
- पूरे बिल पर डिस्काउंट देने से घाटा सब आइटम में बँट जाता है, इसलिए कम रेट से भी कम नज़र आता है।
- भीड़ के समय कोई नहीं देखता; महीने के आख़िर में बस मुनाफ़ा कम निकलता है और वजह पता नहीं चलती।
छोटी रकम जुड़ती जाती है। एक सेल्समैन रोज़ 10 बिल पर ज़रूरत से ₹100 ज़्यादा छोड़े, तो रोज़ ₹1,000, यानी 30 दिन में लगभग ₹30,000 सीधे मुनाफ़े से कम।
पुराना तरीका: टैग पर गुप्त कोड
बहुत सी दुकानें टैग पर ख़रीद का दाम एक गुप्त कोड में लिखती हैं: 10 अक्षरों का कोई शब्द, जिसमें कोई अक्षर दोबारा न आए, 1 से 0 तक के अंकों की जगह लेता है। एक जाना-माना शब्द है BLACKHORSE:
B = 1 · L = 2 · A = 3 · C = 4 · K = 5 · H = 6 · O = 7 · R = 8 · S = 9 · E = 0
टैग पर “₹1,199 · OEE” लिखा हो तो सेल्समैन समझ जाता है कि ख़रीद ₹700 है। तरीका सस्ता और चतुर है, पर इसकी कमियाँ हैं:
- हर नए स्टाफ को कोड सिखाना पड़ता है, और सीखते ही उसे आपकी ख़रीद पता चल जाती है।
- कोड ख़रीद बताता है, यह नहीं कि सेल्समैन कितना नीचे जा सकता है।
- कोड सिर्फ़ टैग पर है। बिल बनने के बाद कोई दाम नहीं जाँचता।
- मालिक को फिर भी नहीं दिखता कि किसने कितना डिस्काउंट दिया।
स्टेप 1: हर आइटम की ख़रीद लिखें
ख़रीद का दाम अपने परचेज़ बिल से लें। हर डिज़ाइन की अलग ख़रीद लिखने की ज़रूरत नहीं: अगर आप आइटम के प्रकार (जींस, कुर्ती, शर्ट) से बिल बनाते हैं, तो हर प्रकार की एक औसत ख़रीद काफ़ी है। एक ही प्रकार में बहुत अलग माल हो, जैसे साधारण और प्रीमियम जींस, तो उन्हें दो अलग आइटम बनाएँ।
स्टेप 2: हर आइटम का कम से कम दाम तय करें
कम से कम दाम वह दाम है जिससे नीचे आप एक पीस नहीं बेचना चाहते। शुरुआत के लिए ख़रीद पर अपना मार्जिन जोड़ें और गोल दाम रखें:
| आइटम | ख़रीद | टैग का दाम | ख़रीद + 20% | कम से कम दाम | मोल-भाव की गुंजाइश |
|---|---|---|---|---|---|
| जींस | ₹700 | ₹1,199 | ₹840 | ₹850 | ₹349 |
| कुर्ती | ₹400 | ₹799 | ₹480 | ₹499 | ₹300 |
| शर्ट | ₹450 | ₹799 | ₹540 | ₹550 | ₹249 |
| साड़ी | ₹1,500 | ₹2,999 | ₹1,800 | ₹1,800 | ₹1,199 |
गुंजाइश वह रकम है जिसमें स्टाफ मोल-भाव कर सकता है। गुंजाइश बहुत कम हो तो शायद टैग का दाम कम है; स्टाफ बार-बार कम से कम दाम पर अटके तो शायद वह आपके बाज़ार के हिसाब से ज़्यादा है। 20% सिर्फ़ उदाहरण है, अपना मार्जिन रखें।
स्टेप 3: बिल डिस्काउंट की सीमा रखें
एक आइटम का कम रेट आसानी से दिखता है, पूरे बिल पर बड़ा डिस्काउंट नहीं। तय करें कि स्टाफ एक बिल पर ज़्यादा से ज़्यादा कितना डिस्काउंट दे सकता है, जैसे 10%, और उससे ऊपर को कम से कम दाम से नीचे बेचने जैसा ही मानें।
डिस्काउंट बाँटने के बाद हर पीस का दाम भी देखें। ₹1,600 के बिल (जींस ₹950 + शर्ट ₹650) पर ₹240 डिस्काउंट में से ₹142.50 जींस के हिस्से आता है। यानी जींस ₹807.50 में बिकी, ₹850 के कम से कम दाम से नीचे, जबकि बिल पर रेट ₹950 लिखा था।
स्टेप 4: नीचे जाने की मंज़ूरी कौन देगा
कभी-कभी आप ख़ुद नीचे जाना चाहते हैं: पुराना ग्राहक, आख़िरी पीस, सीज़न के आख़िर का माल। यह फ़ैसला मालिक का हो, काउंटर का नहीं। आम तरीके:
| नियम | कैसे चलता है | किसके लिए |
|---|---|---|
| सिर्फ़ चेतावनी | स्टाफ को चेतावनी दिखती है, बिल बन जाता है, मालिक बाद में देखता है | भरोसेमंद स्टाफ; शुरू के हफ़्ते, जब आप देख रहे हों कि ऐसा कितनी बार होता है |
| मालिक की मंज़ूरी | बिल तभी बनता है जब मालिक हाँ कहे (ऐप में काउंटर पर PIN डालकर) | नया स्टाफ, सेल का सीज़न, भीड़ वाले दिन |
| सेल के दिन | सेल वाले आइटम का कम से कम दाम उन दिनों के लिए घटाएँ, फिर वापस रखें | क्लियरेंस और त्योहार की सेल |
स्टेप 5: हर हफ़्ते देखें किसने कितना दिया
हफ़्ते में एक बार 15 मिनट काफ़ी हैं। देखें:
- हर स्टाफ ने कितना डिस्काउंट दिया, ₹ में और अपनी बिक्री के % में। कोई एक बाकी सबसे बहुत ऊपर हो तो उससे बात करें।
- कम से कम दाम से नीचे का हर बिल: किसने बनाया, कौन सा आइटम, और आपने मंज़ूरी दी या नहीं।
- जो आइटम बार-बार कम से कम दाम से नीचे जाता है: या तो उसका कम से कम दाम ग़लत है, या उसका टैग कम होना चाहिए।
- जिन आइटम की ख़रीद डाली है उन पर मुनाफ़ा। हफ़्ते-दर-हफ़्ते घटे तो पहले डिस्काउंट देखें।
स्टाफ को नियम और उसकी वजह बताएँ। ज़्यादातर स्टाफ बेईमानी से नहीं, सौदा पक्का करने के लिए ज़्यादा छूट देता है। साफ़ कम से कम दाम से उनका काम भी आसान होता है: उन्हें पता रहता है कि कहाँ तक जा सकते हैं।
Tap & Bill में मोल-भाव गार्ड
Tap & Bill का मोल-भाव गार्ड (Mol-Bhav Guard) स्टेप 2 से 5 काउंटर पर ही करता है, Android ऐप में भी और कंप्यूटर पर भी। ऐप की स्क्रीन हिंदी, गुजराती और अंग्रेज़ी में है।
कम से कम दाम और ख़रीद डालें
Prices & categories (कंप्यूटर) या ऐप की कैटेगरी स्क्रीन पर हर आइटम का कम से कम दाम डालें, और चाहें तो अपनी ख़रीद। स्टाफ को ख़रीद कभी नहीं दिखती।
कितना सख़्त, यह चुनें
Settings → मोल-भाव गार्ड: बंद, स्टाफ को चेतावनी, या मेरा PIN माँगो। 4 से 6 अंक का PIN और स्टाफ डिस्काउंट सीमा % डालें। चाहें तो ख़रीद पर कम से कम मार्जिन % भी (वेब डैशबोर्ड में)।
स्टाफ हमेशा की तरह बिल बनाए
कम से कम दाम से नीचे जाने पर स्क्रीन पर लिखा आता है, जैसे “जींस ₹750 कम से कम दाम ₹850 से नीचे है”। आप PIN डालकर मंज़ूरी दें, या स्टाफ दाम बदले।
रिपोर्ट देखें
मालिक के Overview में हर स्टाफ के बिल, दिया गया डिस्काउंट, कम से कम दाम से नीचे की बिक्री, और जिन आइटम की ख़रीद डाली है उन पर मुनाफ़ा दिखता है।
मालिक के लॉगिन से बने बिल कभी नहीं रुकते। अभी PIN काउंटर के फ़ोन या कंप्यूटर पर ही डाला जाता है; मालिक के अपने फ़ोन से मंज़ूरी देने की सुविधा की योजना है। Android ऐप में बिना इंटरनेट बने बिल कभी नहीं खोते: अगर किसी बिल में बिना PIN नियम टूटा, तो वह रिपोर्ट में “Not approved” (मंज़ूरी नहीं) के साथ दिखेगा। मोल-भाव गार्ड हर प्लान में शामिल है, कोई अलग चार्ज नहीं। मोल-भाव गार्ड के बारे में पूरी जानकारी (English)